योजनाऐं

अनुसूचित क्षेत्र में वर्ष 1993-94 से यह योजना प्रारम्भ की गर्इ। जनजाति के ऐसे प्रतिभावान छात्र जिन्होंने राजस्थान से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित कक्षा 10 एवं 12 की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है तथा विश्वविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की परीक्षा में भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते हैं उन्हें राशि 350 रू प्रति छात्र प्रतिमाह की दर से 10

इस योजनान्तर्गत जनजाति के ऐसे छात्र-छात्राऐं जो राजकीय महाविद्यालय विश्वविद्यालय की स्नातक तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं में पढते हैं, उनमें से जिन छात्र-छात्राओं को छात्रावास में स्थानाभाव के कारण आवासीय सुविधा नहीं मिल पाती है और वह किराये के मकान में रहकर नियमित अध्ययन करते हैं, उनको इस योजनान्तर्गत आवासीय सुविधा उपलब्ध करार्इ जाती है। पैटर्न अनुसार मकान किराया की राशि निम्नानुसार पुनर्भरण की जाती

विभाग द्वारा अनुसूचित क्षेत्र में संचालित आश्रम छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों, मॉडल पब्लिक रेजीडेन्शियल स्कूलो एवं खेल छात्रावासों के कक्षा 9वीं व 11 के आवासीय छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर का बुनियादी ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान नोलेज कारपोरेशन लि. के माध्यम से राजस्थान स्टेट सर्टीफिकेट कोर्स ऑफ आर्इ. टी. का प्रशिक्षण दिया जा रहा है । योजना के पैटर्न अनुसार आर.एस.सी.आर्इ.टी.

जनजाति छात्र-छात्राओं को शहरी, वैज्ञानिक, पर्यावरणीय व आधुनिक ज्ञान उपलब्ध कराने की दृष्टि से आश्रम छात्रावासों के छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण कराये जाने के उददेश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान कम से कम राजस्थान के शैक्षणिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर छात्र-छात्राओं को भ्रमण कराते हुए जनजाति छात्र-छात्राओं की जिज्ञासा पूरी करने का प्रयास किया जाता है। इसका

आश्रम छात्रावासों के कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के छात्र-छात्राओं को आश्रम छात्रावास में ही विषय विशेषज्ञ के माध्यम से 6 माह तक कठिन विषयों की कोचिंग करार्इ जाती है ताकि छात्र-छात्राऐं कठिन विषयों की अच्छी तैयारी कर अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो सकें। कक्षा 10 वीं में अंग्रेजी, विज्ञान एवं गणित तथा कक्षा 12 में कला वर्ग में अनिवार्य अंग्रेजी व ऐच्छिक अंग्रेजी, वाणिज्य वर्ग में अनिवार्य अंग्रेजी तथा त

यह योजना स्‍वच्‍छ परियेाजना द्वारा वर्तमान में अनुसूचित जनजाति / कथौडी परिवारो के ऐसे बालक / बालिका जो शिक्षा से वंचित है के लिए संचालित की जा रही है। जिला उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाडा, प्रतापगढ, एवं सिरोही क्षेत्र में निवासरत जनजाति समुदाय के बालक बालिकाऐं जो आयुवर्ग 6 से 12 के है जिस क्षेत्र में प्राथमिक श्क्षिा (मां-बाडी केन्‍द्र पर कक्षा पहली एवं चौथी की शिक्षा) हेतु 2 से 5 किमी पैदल चल कर जा

अनुसूचित क्षेत्र में दो मॉडल पब्लिक रेजीडेन्शियल स्कूल, ढीकली (उदयपुर) एवं सूरपुर (डूंगरपुर) का संचालन किया जा रहा है। दोनों स्कूलों की कुल क्षमता 420 छात्र-छात्रा है जिसके विरूद्ध शिक्षा सत्र 2015-16 में 420 छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया गया है। मॉडल पब्लिक रेजीडेन्शियल स्कूल, ढीकली बालिका एवं मॉडल पब्लिक रेजीडेन्शियल स्कूल, सूरपुर बालक हेतु है।

अनुसूचित क्षेत्र, माडा क्षेत्र तथा सहरिया क्षेत्र में छात्र-छात्राओं में शिक्षा के उन्नयन हेतु भारत सरकार द्वारा आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराया गया है। आवासीय विद्यालयों में स्वीकृत शैक्षिक अशैक्षिक पदों पर शिक्षा विभाग से कर्मचारियों अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति  पदस्थापन पर लिये जाकर अध्ययन व्यवस्था संचालित की जा रही है। इन आवासीय विद्यालयों में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर का पैट

अनुसूचित क्षेत्र में जनजाति छात्रों को खेल-कूद हेतु प्रोत्साहित करने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करने के उददेश्य से राजस्थान राज्य क्रीडा परिषद, जयपुर के खेल छात्रावास पैटर्न पर 6 खेल छात्रावास यथा जिला स्तरीय खेल छात्रावास, लोधा (बांसवाडा) 100 छात्र क्षमता एवं खेरवाडा (उदयपुर) 50 छात्र क्षमताए संभाग स्तरीय खेल छात्रावास, सरद

जनजाति छात्र-छात्राएं उनके निवास स्थान के नजदीक वांछित स्तर का विद्यालय नहीं होने की स्थिति में उनके परिवारों की कमजोर आर्थिक सिथति के कारण दूर-दराज के विद्यालयों में अध्ययन जारी नहीं रख पाते हैं। अत: ऐसे छात्र-छात्रा अध्ययन जारी रख