5TH SCHEDULE OF INDIAN COSNTITUTUON

“पाँचवी और छठवीं अनुसूची” आदिवासियों के लिये किसी “धर्मग्रंथ” से कम नही है।

5TH SCHEDULE OF INDIAN COSNTITUTUON

संविधान की “पाँचवी और छठवीं अनुसूची” 'अनुसूचित जनजाति'  के लिये किसी “धर्मग्रंथ” से कम नही है । क्योंकि 'अनुसूचित जनजाति'  के सुरक्षा और हित की तरफदारी इन्ही कानूनो मे निहित था । “पाँचवी और छठवीं अनुसूची” संविधान की पुस्तक मे “शव्दो” के रूप मे सत्तर वर्षों से कैद पड़ा है जिसे आजतक 'अनुसूचित क्षेत्र' Schedule Area के लोगो ने उसका स्वाद नही चखा । आज भी 'अनुसूचित जनजाति