मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ - संध्या कुमारी

" प्रकृति पूजक संस्कृति रक्षक आदि आनादिकाल वासी आदिवासी मूल वासी "

मैं आदिवासी समाज से प्रेम करती हूँ,मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ | मेरे आदिवासी समाज की संस्कृति अन्य समाजो से बिलकुल अलग है | और आदिवासी समाज की संस्कृति से अन्य समाजों ने कई रीती रिवाजों को अपनाया भी है |हर समाज का इतिहास प्राचीन होता है,और हर व्यक्ति को अपने समाज से प्रेम होता है |मुझे भी अपने आदिवासी समाज से लगाव है |पर जब मैं यह सब कुछ नहीं जानती थी, कि आदिवासी समाज क्या होता है ? तब कुछ भी नही समझती थी और मुझे खुद को या किसी ओर आदिवासी समाज के व्यक्ति को कोई आदिवासी कहता तो मुझे बुरा लगता था |

                               " भारत में सिर्फ आदिवासी है एक ऐसा समुदाय जो प्रकृतिमूलक है,

                                        जिस की जीवन प्रणाली बोली परम्परा रिती-रिवाज ,पहनावा,

                              संगीत-वाद्य, ज्ञान -कला संस्कृति व्यवहार आज भी सब से अलग है"

आज जब मैंने ये जाना की आदिवासी समुदाय इस धरा पर सबसे पहले से निवास कर रहा है |जब कोई भी नहीं था और अगर सबसे पुराना और प्राचीन समाज कोई है तो वो है आदिवासी समाज |आदिवासी समाज जितना पुराना है उतनी ही पुरानी इस समाज की संस्कृति है | जो की आज भी मेरे आदिवासी समाज में मुझे देखने को मिलती है | इतना ही नहीं बल्कि आज का युग जो की कई क्रांतियों से भरा पड़ा है,जैसे वैज्ञानिक क्रांति,श्वेत क्रांति,हरित क्रांति आदि | इसके बावजूद भी मेरा आदिवासी समाज हर रिवाज को पूरी तन्मयता के साथ निभाता आ रहा है |

                                     " हजारो-हजार साल का जिन्दा इतिहास हु में,

                                 मुझे आदिवासी कहते है, जैव विविधता को अपने में समेटे |

                                      कहते है मैं हजारो हजार साल एक साथ जीता हु,

              आज मेरे बच्चे हजार साल पुरानी संस्कृति भी जीते है तो आज की आधुनिक संस्कृति भी "

मुझे गर्व है की मैं आदिवासी हूँ,क्योंकि मेरा आदिवासी समाज कभी किसी का गुलाम नहीं हुआ |मेरे समाज ने ही तो जो राजपूत क्षत्रिय थे उन्हें अपने क्षेत्र में पनाह दी,और उनकी उनके शत्रुयो से रक्षा की थी | आज भी अगर किसी कार्य को करना होता है तो सबसे पहले आदिवासी समुदाय को याद किया जाता है | हमारे भारत देश के कई कार्य जिसमे मकान बनाना,हमारे शहरो में बनने वाले कई तरह के भवनों के कार्य,खेती करने वाले लोग भी मेरे आदिवासी समाज के है |मेरे आदिवासी समाज के कई महान पुरुषो ने भारत की आज़ादी के लिए भी अपना योगदान दिया है लेकिन कही किताबो में मुझे उनके विषय में ज्यादा पढ़ने को नहीं मिला |मैं यहाँ दो उदाहरण देना चाहूंगी १.बांसवाड़ा के मानगढ धाम की घटना और २.सिरोही के भुला में लिलुडी बड़ली की घटना मुझे मेरे आदिवासी समाज के योगदान की याद दिलाता है |मैं इस बात से हमेशा खुश रहती हूँ की कुदरत ने मुझे आदिवासी समाज में जन्म दिया |

                     " मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ क्योंकि मैं इस धरती कि मूलवासी हूँ,

                      मेरी अपनी संस्कृति है , मेरी अपनी भाषा है हम किसी पर आश्रित नहीं है,

              हमारा अपना वजूद है आदिवासी न तो आस्तिक है, न तो नास्तिक है ,आदिवासी वास्तविक है "

एक बात जो मेरे मन के भीतर है वह यह कि मेरी तरह मेरे समाज के और भी कई युवा साथी जो कि अपने आपको आदिवासी कहने में शर्म महसूस करते है, वो इसीलिए क्योंकि वो आदिवासी का सही अर्थ एवम उसका अपना महत्व नहीं जानता |जब आज मैं आदिवासी होने पर गर्व कर रही हूँ तो मुझे आशा है कि मेरे आदिवासी समाज का हर व्यक्ति अपने आप पर गर्व करके कहेगा कि मैं आदिवासी हूँ |और मुझे भी इस बात पर गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ |

                      '' चलती रहूंगी मैं पथ पर चलने मे माहिर बन जाऊँगी ,

                  मेरी अस्मिता को उजागर करुँगी मेरी संस्कृति का एक अंग बनूँगी "

 

विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम आये विद्यार्थी का निबंध

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मामेर
कोटड़ा तहसील, जिला उदयपुर, राजस्थान
नाम - संध्या कुमारी
कक्षा - 12th
विषय -  मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ    

Comments

BHAVIK PARGEE's picture

बधाई

RAJESH DAMA's picture

बधाई आगे बढ़ो ....

Aane vala kel aapka ho

Aane vala kel aapka ho

Aane vala kel aapka ho

PRAKASH CHANDRA CHARPOTA's picture

बधाई

Humhe Naj h aap pr JAY ADIWASI

मुझे पढ़ कर अच्छा लगा और मै खुश हूँ की हमारे भावी युवा पीढ़ी समाज और अपने आप को पहचानते है ।
इतने कम उम्र में उन तमाम तत्वों का समावेश करते हुए जो सोच हम सब के बिच में रही हो ।
मै जब 11वी 12वी या college में रहाँ तब भी मै य मेरे मन में ऐसे विचार नही उभरे । इनती कम उम्र में ऐसी विचार रखना काबिले तारीफ है । अपने आस पास ऐसे ही विचारो को बिखेरती रहना ।

very very best

Aane wala Kal adiwasi ka ho

बधाई

बधाई

बधाई

very nice.....
मुझे गर्व है मै आदिवासी हू।

हाँ,मैं आदिवासी हूँ,भारत का मूल निवासी हूँ।

अभिषेक गोंड
,बक्सर बिहार
9122612705
Facebook. com abhishekkr gond

हाँ,मैं आदिवासी हूँ,भारत का मूल निवासी हूँ।

अभिषेक गोंड
,बक्सर बिहार
9122612705
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Mera sobhagya hai ki me aadiwasi hu

बहुत बढ़िया संध्या हमे आप जैसे विद्यार्थी पर गर्व हे

बधाइ हो

Khub padho or badho ... Jai adiwasi

मुझे गवॅ है कि मेरे आदिवासी हू

मुझे गर्व हे की में भील हु

Jay aadiwashi

बहोत सुन्दर लिखा एक आदिवासी बेटीने जिसपर हमें नाज होना चाहिए ।

बहुत खूब...धन्यवाद

I proud of my Bheel cast

I proud of my Bheel cast

आदिवासी है हम.....!!!!!

Adim Samaj Party App ke Sath hai Ham Adivasi samaj ka koi nahi cahta Ki o bhi vikash kare agey bade liken ab aysa nahi hoga

Garv we kaho ki ham Adivasi h aur is Bharat desh ki mul niwasi h.
Hamlog us samaj se aate h jaha sadiyo se prakriti se prem karte h.
Hamlog us samaj se aate h jisme sada se pashu pakshi aur had jiwo se prem raha h.
Hamlog us mahan adivasi Sanskrit I se aate h betio ko samman diya jata h kavi unhe garv m maara nhi jata.Hamare adivasi samaj m bahuwo ko dahej k liye jalaya nhi jata.Ham adivasi garib ho sakte h par beimaan nhi.Hamlog mehnati hote h.
Isiliye Bharat desh ke har adivasi ko khud par garv hona chahiye.
Garv se kaho ham adivasi h.
Garv se kaho ham eklvya k bansaj h.
Garv she kaho ham kol h.

आप श्री गुलाम बाबा । ।आप की जय ।

Jai Adivasi

Garv we kaho ki ham Adivasi

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९६५७३७७८२९
e-Mail: 
ravindraghane19 @gmail com

I proud

Jai adivasi adivasi Desh Ka Mul nivasi Aur Main Apne audio se bahut pyar karta Jab Hum ko school me padhte the apne aap ko adivasi Kehne Mein Kabhi Kuch nahi Koi adivasi ke baare me ke Totta Hum uska muh Tod Ke jawab deti thi

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9799584291

आदिवासी वास्तव में भारत भूमि की आदिम संस्कृति के पहरूए हैं। यह वह संस्कृति है, जिस पर अन्य संस्कृतियों का हमला नहीं हो सका है और जिसने अपनी परम्पराओं को इक्कीसवीं शदी के दुष्चक्रों के बावजूद सहेजकर रखने में कामयाबी पाई है लेकिन फिर भी इनके साथ जो अत्याचार हो रहा है, उसका चित्रण डॉ. भीम अपनी कविता ”हम आदिवासी हैं“ में करते है-<br>
इस देश के मूल निवासी हैं,<br>
हम आदिवासी हैं,<br>
हम आदिवासी हैं।<br>
हमारा जीवन सहज<br>
सरल एवं न्यायपूर्ण है फिर भी,<br>
सदियों से शोषण का चक्र चला,<br>
सदा उसने हमें दबोचने का यत्न किया<br>
सत्ताधारी, पंूजीपति<br>
सेठ, साहूकार, ठेकेदार<br>
पुलिस, सरकारी कर्मचारी<br>
सबने हमारा शोषण किया, दमन किया<br>
जल, जंगल, जमीन से<br>
पहाड़ों, झीलों एवं नदियों से<br>
हमें बेदखल करने का भरपूर प्रयास किया<br>
हमारी रोजी-रोटी हड़पने का ज़ोरदार यत्न किया<br>
हम आदिवासी हैं।<br>
साक्षर हो जाने के बाद आदिवासी समाज से निकले कवियों लेखकों ने अपने समाज को जागरूक करने को बेड़ा उठाया है। उन्हें यह समझ में आने लगा है कि हमारे हितों की बात करने वाले ढोंगी लोग हमारे ही शोषण का वायरस बन गए हैं और वे हमारी गाथा बेचकर स्वयं धनी हो रहे हैं, जबकि हम वहीं हैं, जहां पहले हुआ करते थे-<br>
हम स्टेज पर गए ही नहीं<br>
और हमें बुलाया भी नहीं गया<br>
उंगली के इशारे से<br>
हमें अपनी जगह दिखा दी गई<br>
हम वहीं बैठे रहे<br>
हमें शाबासी मिली<br>
और वे मंच पर खेड़ होकर<br>
हमारा दुख हमसे ही कहते रहे<br>
हमारा दुख हमारा ही रहा<br>
कभी उनका नहीं हो पाया<br>
हमने अपनी शंका फुसफुसाई<br>
वे कान खड़ेकर सुनते रहे<br>
फिर ठण्डी सांस भरी<br>
और हमारे ही कान पकड़ हमें डांटा<br>
माफी मांगो, वरना--- आदिवासी शब्द दो शब्दों आदि और वासी से मिल कर बना है और इसका अर्थ मूल निवासी होता है। भारत की जनसंख्या का 8.6% (10 करोड़) जितना एक बड़ा हिस्सा आदिवासियों का है। पुरातन लेखों में आदिवासियों को अत्विका और वनवासी भी कहा गया है

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9009400503
e-Mail: 
pintusenani@gmail .com

हूंल जोहार
युवा क्रांति का नाम है हूल जोहार
हमरे समाज मे बदलाव लाने के लिए यह जरूरी है की ऐसे क्रांतिकारी एवं दृढ़निश्चयी संदेश हमारे युवाओ तक पहुचाये जाए जिससे हमारे युवा साथी समाज के लिए आगे आने की हिम्मत करेंगे
जय जोहार

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mahesh786kalasua.mm67@gmail.com

जय गोडवाना

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