शिक्षा और सँस्कृति का संदेश देता यह सम्मान समारोह....बात भगवान बिरसा मुंडाजी के जन्मोत्सव की

बदनावर जयस की जुझारू टीम ने अपनी मेहनत और एकता का परिचय देते हुए बदनावर शहर में दिनांक 15 नवंबर 2015 रविवार को हमारे आदिवासी समाज के भगवान बिरसा मुंडाजी का जन्मोत्सव मनाया गया। यही नहीं इस कार्यक्रम में बदनावर जयस के साथ साथ रतलाम, उज्जैन, बड़नगर, पीथमपुर, देवास, झाबुआ एवं कुक्षी के आदिवासी समाजजन उपस्थित हुए। बहुत बढ़िया रहा। जयस संरक्षक डॉ. हीरा अलावाजी, आदिवासी एकता परिषद् के श्री पोरलाल खरतेजी एवं श्री राजेंद्र बारियाजी रतलाम के श्री लक्ष्मणसिंह डिण्डोरजी, श्री अमरसिंह भूरियाजी, श्री अर्जुनसिंह मालीजी, रूपचंद रावतजी, श्री सुरतलाल डामरजी, श्री कमलेशजी डामरजी, जयस प्रभारी झाबुआ, सरदारपुर, बड़नगर एवं बदनावर क्रमशः श्री महेश भाबरजी, भारतसिंह गामड़जी, मनोहरलाल गरवाल, राजेश मुनियाजी, एकलव्य शबरी संगठन के श्री मुकेश मंडलोईजी इत्यादि के साथ साथ नारी शक्ति श्रीमती सोलंकीजी एवं श्रीमती खरतेजी तथा आदिवासी होनहार जिनको समारोह में सम्मान किया जाना था वह भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम स्थल की शोभा बड़ा रही थी। कार्यक्रम में जय आदिवासी युवा शक्ति के रूप में जयस संरक्षक जगदीश महावीजी, जयस उपाध्यक्ष जँयतिलाल मेहरा, संतोष मुनियाजी, सह कोषाध्यक्ष कैलाश सिसौदियाजी, सचिव राधे डॉवरजी, संगठन मंत्री मालवसिंह भाभर, सह मीडिया प्रभारी प्रकाश डोडियार, राजेश मंडलोई, दिनेश वसुनियाजी, भेरूलाल गणावाजी साथ ही वह सभी जिनका नाम उल्लेख नहीं कर सका और मैं स्वयं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा रहे। कार्यक्रम का आरंभ भगवान बिरसा मुंडाजी को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करते हुए किया गया। कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक हस्तियों ने सर्वप्रथम भगवान बिरसा मुंडाजी द्वारा समाज में किए गए कार्यों को याद किया गया वहीं दूसरी और आदिवासी समाज के संबंध में अपनी बात को रखी तथा "एक तीर एक कमान सभी आदिवासी एक समान" के जोश से भर दिया। कार्यक्रम में जब श्रीमती खरतेजी एवं भूरियाजी ने अलग अलग तैयार की गई अपनी आदिवासी रचना को गीत के माध्यम से प्रस्तुति दी गई तो उपस्थित सभी समाजजनों को एक स्फूर्ति से भर गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुझे वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। मेरी अस्वस्थता के फलस्वरूप मैंने उपस्थित सभी समाजजनों से वक्तव्य देने में असमर्थता प्रकट करते हुए क्षमा चाही गई। क्योंकि मैंने पहले से ही आमंत्रण पर एक श्रोता के रूप में सभी वक्ताओं का स्वागत करने का अनुरोध कर चुका था। इसके पश्चात् क्रमशः सरदारपुर जयस प्रभारी श्री भारतसिंह गामड़जी, आदिवासी एकता परिषद् रतलाम के राजेन्द्र बारियाजी, रूपचंद रावतजी, सुरतलाल डामरजी, कमलेश डामरजी, जयस प्रभारी झाबुआ महेश भाबरजी, जनपद सीईओ श्री लक्ष्मणसिंह डिण्डोर, श्रीमती खरतेजी मेडम, इन्कम टैक्स (कमिश्नर) अधिकारी जगन सोलंकीजी, बदनावर के भूरियाजी, रतलाम के अमरसिंह भूरियाजी, जयस प्रभारी बड़नगर मनोहरलाल गरवाल, दिनेश वसुनियाजी, रतलाम से अर्जुनसिंह मालीजी, आदिवासी एकता परिषद् के श्री पोरलाल खरतेजी, नेशनल जयस संरक्षक डॉ.हीरा अलावाजी ने सभा को संबोधित किया गया। इस कार्यक्रम में आदिवासी एकता परिषद् के श्री पोरलाल खरतेजी ने आदिवासी वेशभूषा धारण कर आदिवासी समाजजन को अपनी सँस्कृति के प्रति संदेश दिया की हमें अपनी सँस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहिए चाहे हम कितने ही बड़े ओहदे पर पहुँच जाए। इसी प्रकार जयस संगठन बदनावर एवं एकलव्य शबरी संगठन बदनावर द्वारा संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आदिवासी समाज के जिन छात्र एवं छात्राओं को सम्मानित किया गया यह कार्य ऐतिहासिक होने के साथ साथ आदिवासी समाज को शिक्षा के प्रति जागृति लाने के लिए उठाया गया कदम था। कार्यक्रम का संचालन भी उम्दा रहा। बदनावर में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतििथगण, समाजजनों, कार्यक्रम के आयोजक मुकेश मंडलोई एवं उनकी टीम, तथा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जिन्होंने अपना अमूल्य समय देकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी महती भूमिका निभाई। मैं उन सभी साथियों का आत्मीयता से आभार व्यक्त करता हूँ। तथा बदनावर जयस टीम भविष्य में आगे जब भी कोई आयोजन में आपको सादर आमंत्रित करते हैं, तो उनके विनय को कभी अस्वीकार नहीं करेंगे।

इसी आशा और विश्वास के साथ आप सभी का पुन: आभार एवं सधन्यवाद।

।। हमारी आदिवासी सँस्कृति हमारी धरोहर हैं ।।

।। आदिवासी समाज में शिक्षा की आवश्यकता पहली प्राथमिकता हैं ।। ~~~~~~~~~~~~~~~~

मोहनलाल डॉवर जयस विकास परिषद् बदनावर जिला धार (मध्यप्रदेश)

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nice sir

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