झारखण्ड के आदिवासियों का भूमि कानून और उनका संशोधन क्यों और किसके लिए

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के मुद्दे पर झामुमो विधायक ‘दीपक बिरुवा’ व मनोहरपुर विधायक ‘जोबा मांझी’ ने 21 नवम्बर 2016 को  टीएसी सदस्य से राज्यपाल को पत्र प्रेषित कर इस्तीफा दे दिया था।  विधायक दीपक बिरुवा ने बताया कि वह  'जनजाति सलाहकार परिषद' का सदस्य है।  सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट की मूल भावना से विरुद्ध जबरन असंवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर संशोधन का प्रस्ताव सभा में लाया गया । विधायक 'दीपक बिरुवा' व 'जोबा मांझी' इस कार्य से काफी आहत होते हुए अपने सदस्यता  से इस्तीफा दे दिया था ।

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म नहीं हुआ था।  इसे लेकर 21 नवम्बर 2016 को झारखण्ड विधानसभा में हंगामा भी  हुआ था।  विपक्षी दल के विधायकों  ने सदन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कमाल की बात यह थी की  हंगामे के बीच किसी तरह 3010.86 करोड़ का अनुपूरक बजट भी पास किया गया। उसके तीन दिन पश्चात् झारखण्ड  विधानसभा में  सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन विधेयक  को विधानसभा में पेश किया किया गया। 

संविधान की पांचवी अनुसूची अनुच्छेद 244(1) के अनुसार प्रत्येक राज्य में जहाँ अनुसूचित क्षेत्र है एक ' जनजाति सलाहकार परिषद' की स्थापना होनी चाहिए। जिसके सदस्यो की संख्या 20 से काम नहीं होनी चाहिए और जिसमे  तीन चौथाई सदस्य राज्य के विधान सभा के आदिवासी विधायक होंगे। 

' जनजाति सलाहकार परिषद' का कर्तव्य है की राज्य के आदिवासियों के कल्याण और प्रगति के मुद्दे पर  सलाह देता है जिसपर राज्य का राज्यपाल निर्देश दे सकता है। राज्यपाल द्वारा जमीन हस्तांतरण को आदिवासियों के मध्य किसी अन्य के लिए आदिवासियों की भूमि का हस्तांतरण  प्रतिबंधित या सिमित कर सकता है। ' जनजाति सलाहकार परिषद' के सलाह के बिना कोई भी  नियम  नहीं बनाया जा सकता ।  

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, CNT-Act 1908, का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा करना था। इस कानून की अवधारणा भी आदिवासियों की परम्परागत व्यवस्था  यानी 'कस्टमरी लॉ' था। 

सी एन टी एक्ट की धारा 46 , 71(A) में भूमि बेचने भूमि वापसी का प्रावधान है। झारखण्ड में तीन तरह के काश्तकारी नियम चलते है -

1. भुईंहरी

2. मुंडारी खूंटकती 

3. रैयत 

इन नियमो के तहत आदिवासियों के जमीन को खरीदने और बेचने के कई नियम है। सी एन टी एक्ट की धारा- 46 के मुताबिक आदिवासियों की जमीन बिना उपायुक्त यानी ‘डिप्टी कमिश्नर’ के सहमति से कोई भी गैर आदिवासी किसी भी प्रयोजन के लिए भूमि  खरीद सकता था  जैसे  शिक्षा , धार्मिक कार्य , खनन ,या उद्योग।इस प्रावधान का गैर आदिवासियों द्वारा  बहुत गलत इस्तेमाल किया गया और आदिवासियों की जमीन को गलत तरीके से हड़पा गया। तब 1996 में ‘बिहार सरकार’ ने  CNT- Act संसोधन विधेयक लाकर खनन और उद्योग को छोड़ बाकि सभी प्रयोजनों को निरस्त कर दिया। CNT- Act,1908 के मूल प्रावधान में खनन के  लिए आदिवासियों की  जमीन लेने  का  कोई प्रावधान नहीं था लेकिन 1929 में CNT- Act में संसोधन कर आदिवासियों की जमीन खनन के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया जिसके फलस्वरूप आदिवासियों की जमीन का जम कर लूट हुई। ऐसे हालात में 12 अक्टूबर 1938 में CNT- Act के Section-9 में संसोधन करते हुए मूल रैयत की बात रखी गई। इस संसोधन में मूल रैयतों की जमीन का हस्तांतरण पर रोक लगाई गई। उसके बावजूद आज भी झारखण्ड के छोटानागपुर क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन की खरीद फरोख्त एक व्यवसाय बन गया। कई दलाल जिनमे खुद आदिवासी लोग शामिल थे थोड़े से रुपयो के लालच में  कॉरपोरेट के लिए जमीन मुहैया करने का काम करते रहे। जो CNT- Act 25/1947 के कारण हो रहा है। 1997 को  सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जिसे 'समता  जजमेंट' भी कहते है ने ‘अनुसूचित क्षेत्र’ एवम ‘वन क्षेत्र’ में खनन पर रोक लगा दी है।  

इस कानून के तहत जमीन वापसी की सीमा 30 वर्ष कर दी गयी थी। लेकिन इस यह समय सीमा भूमि वापसी के लिए उपयुक्त नहीं थी क्योकि आदिवासियों की जमीन का हस्तांतरण 1938 से 1969 के बीच हुई थी जिसपर संसोधन किया जाना बहुत जरुरी था। क़ानूनी तरीके से यह नियम आदिवासियों के हित में लगता था लेकिन यह कानून आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों के हाथो में हस्तांतरित करने का एक बेहतर जरिया बन गया था जो की आदिवासियों के समझ से पर था। विगत  69 वर्षो से आदिवासियों को जमीन का एक ढेला तक वापस  नहीं   मिला बल्कि प्रशासनिक अधिकारियो के मनमाने रवैये के कारण आदिवासियों की जमीन की खूब लूट मचती रही। 

CNT Act  / SPT Act  आदिवासी भूमि संरक्षण जैसे कानून होने के बाद भी झारखण्ड में गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों की 36,496  एकड़ जमीन पर कब्जा किया गया। इस बाबत आदिवासियों द्वाराजमीन वापसी के 4,745  केस कई न्यायालयों में निरस्त पड़े हुए है। भूमि हस्तांरण का मामला सबसे ज्यादा झारखण्ड की राजधानी रांची में हुआ है। रांची में लगभग  3,541 केस कोर्ट में निरस्त पड़े हुए है जिसकाफैसला आजतक नहीं हुआ।

झारखण्ड प्रदेश के आदिवासियों की कब्ज़ा किये गए भूमि का जिलावार ब्यौरा। 

 

जिला

लंबित मुक़दमे

रकबा ( एकड़ में )  

1

रामगढ़

59

64.645

2

पाकुड़

110

86.38

3

पु सिंहभूमि

37

11.32

4

प सिंहभूमि

22

15.43

5

जामतारा

6

0.168

6

सरायकेला

56

70

7

रांची

3541

1894.63

8

पलामू

4

29.4

9

हजारीबाग

7

27.69

10

धनबाद

18

23.605

11

गुमला

109

90.76

12

गिरिडीह

2

16.83

13

लोहरदगा

50

171.81

14

गढ़वा

5

6.11

15

लातेहार

665

1299.93

16

खूंटी

8

7.56

17

सिमडेगा

4

0.29

18

बोकारो

19

45.17

19

गोड्डा

22

17.73

20

साहिबगंज

1

0.06

 

 

 

स्त्रोत : कल्याणविभाग

यहाँ यह बताना उचित होगा की CNT एक्ट की धारा 71(A) के द्वारा अवैध रूप से आदिवासियों की जमीन का हस्तांतरित भूमि को मूल रैयत को वापसी का प्रावधान है। उक्त प्रावधान होने के बावजूदआदिवासियों की जमीन का अवैध रूप से हस्तांतरण का विगत कई वर्षो से अनेक शिकायते आयी थी। जिसकी रोकथाम के लिए झारखण्ड सरकार ने अपने मंत्री परिसद की एक बैठक में 24 मार्च 2014 कोअनुसूचित जनजातियोंके जमीन के अवैध हस्तांतरण एवं सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण की 'उच्च स्तरीय जाँच दल' ( Special Investigation Team – SIT) के गठन की स्वीकृति दी थी। - ( राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग - 7/SIT का गठन -47/15  दिनांक – 01-04-2014 )

वर्ष 2016 में  फिर ऐसा ही दोहराया जा रहा है। छोटानागपुर  काश्तकारी अधिनियम की धारा 21 (ख) में गैर कृषि भूमि के नाम पर कृषि योग्य भूमि पर सुनियोजित तरीके से हस्तांतरण किया जायेगा जिसे स्थानीय आदिवासी कभी बर्दास्त नहीं कर सकते। फिर से उन कानूनों का गलत व्याख्या कर बड़े आसानी से आदिवासियों की जमीन का  हस्तांतरण की तैयारी हो रही है जिसे बड़े गंभीरता से लेना होगा।

 

-    राजू मुर्मू

Comments

adivasi bhai aur bahno jamin hi hamari aatma hai hume eski suraksha apni jaan de kar bhi karni hogi warna ye bjp sarkar hum logo ko jinda hi maar dalegi.

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7050121971

महाशय,
मै जानना चाहता हूँ की अगर कोई आदिवासी भाई या बहिन अपनी मर्जी से अपना भूमी बेचना चाहे जो की कृषी योग्य न हो तो वो अपनी भूमि क्यों नहीं बेच सकते। और वो भी सिर्फ 5 या 10 डिसमिल।

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यदि cnt जमीन का हस्तांतरण समान cnt जाति को करना हो तो अनुमति लेने का क्या नियम है ।

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Shiv71985@gmail.com

Aj logo ne Adivasi jharkhandiyo ka rakt se sana mitti ko deemak ki tarah chata ja raha hai ...ek din sayad chat denge ..par aisa nahi hone denge kasam jharkahad ki jab tak hai jan???????--

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abitirkey0@gmail.com

Please i give best school for ranchi

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Cnt act bana rhy gariv aadhivasi kissan ka jamin hai

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mundapurna78@gmail.com

दो भाई के खतीयानी जमीन मे यदि एक छोटे भाई का कोई पुत्र वंशज नहीं है सिर्फ पत्नी है ,तो क्या बडे भाई की वंशज पुत्र के बिना उस खतीयानी जमीन से अपने हिस्से का जमीन बेच सकता है,(छोटे भाई की पत्नी) किसी अपने ही खानदान के व्यक्ति को जमीन का मालिक बनाकर।

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9572981823
e-Mail: 
bahadur.tanti@gmail.com

mein obc se hu or ranchi me 2012 ko 5 decimal cnt land purchase kiya,kya ye land mere naam pe registerd ho skta agar nhi to kyon.

e-Mail: 
Shashikantsharma7777@gmail.com

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