लेख

हमारे पुरखा तो हजारो वर्षो से अपनी भूमि मे पत्थर गाड़ते आ रहे है ताकि भूमि का मालिकियत और दावेदारी कर सके । जनजाति दर्शन मे विश्व के अन्य महाद्वीपों मे ऐसे प्राचीन शिलालेख देखने को मिलेंगे जिसे वहाँ के ' नेटिव ट्राइब' लोगो ने हजारो वर्ष पूर्व पत्थर गाड़े थे जिसका प्रमाण आज भी मेक्सिको , अमेरिका , अफ्रीका , मध्य एशिया , भारत , आस्ट्रलिया मे देखने को मिलेंगे ।

इतिहास के पन्‍नों से

30 अक्टूबर 1292 भीलराजा डूंगर बरंडा शहादत दिन पर शत् शत् जोहार नमन।आज के राजस्थान भीलप्रदेश के डूंगरपुर की स्थापना भीलराजा डूंगरबरंडा ने की थी।और आज भी डूंगरपुर उन्ही के नाम से नामांकित एवम् प्रसिद्ध है।

कानुन की जानकारी

'झारखण्ड प्रदेश' जिसकी कल्पना देश की आजादी के पूर्व एक 'जनजाति बहुल प्रदेश' के रूप मे किया गया था । इस प्रदेश में लगभग 33 से भी ज्यादा जनजाति समुदायों का निवास सदियों से रहा है। मुख्यतः जनजाति समुदाय झारखण्ड के आंचलिक एवम वन प्रदेशो में निवास करते है और इनका जनजीवन बहुत ही सरल है। खेती इनका मुख्य पेशा है लेकिन इनका जीवन जंगलों पर भी आश्रित थे ।

परम्‍पराऐं

आदिवासी कौन है। आदिवासी कोनसा धर्म मानता है। आदिवासी की परम्‍परायें क्‍या है। 1871 से लेकर 1941 तक की जनगणना में आदिवासी को अन्‍य धमों से अलग धर्म में गिना गया है | एेसे अनेकों प्रश्‍न है जो यह सोचने पर मजबूर करते है कि आदिवासी वास्‍तव में कौन है ?

संस्‍क़ति

वारली चित्रकला एक प्राचीन भारतीय कला है जो की महाराष्ट्र की एक जनजाति वारली द्वारा बनाई जाती है। और यह कला उनके जीवन के मूल सिद्धांतो को प्रस्तुत करती है। इन चित्रों में मुख्यतः फसल पैदावार ऋतु, शादी, उत्सव, जन्म और धार्मिकता को दर्शाया जाता है।

स्‍वास्‍थ्‍य अपडेटस

देर से कटी प्याज का कभी उ पयोग ना करें।प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं। कटी रखी प्याज दस मिनिट में अपने आस पास के सारे कीटाणु अवसोशित कर लेती है। यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है। जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले घर में सुबह शाम हर कमरें में प्याज काट कर रख दें।बाद में उसे फैंक दें।सुरक्षित बने रहेंगें।